Computer Architecture in hindi | कंप्यूटर आर्किटेक्चर क्या है हिंदी में

Computer Architecture in Hindi – आज हम लोग इस Article में जानेंगे कि कम्प्यूटरकी संरचना (Computer Architecture) क्या है और इसके प्रकार हिंदी में (What is Computer Architecture in Hindi) सभी के बारे में हम लोग आज विस्तार से जानेंगे | Computer Architecture kya hai इन सब केआर बारे मे हम आज जानेगे ।

Computer Architecture in hindi क्या है?

कंप्यूटर आर्किटेक्चर से क्या तात्पर्य है? – कम्प्यूटर (computer)  के विभिन्न अवयव (Components) एवं उनके मध्य सम्बन्ध को कम्प्यूटर की संरचना (Computer Architecture) कहते हैं। लगभग सभी कम्प्यूटरों की संरचना एक ही तरह की होती है।

Computer Architecture

Computer के कितने भाग होते है? 

कंप्यूटर आर्किटेक्चर कौन है? कम्प्यूटर के प्रमुख तीन भाग होते हैं, जो निम्नलिखित हैं

01इनपुट / आउटपुट यूनिट (Input / Output Unit)
02सेण्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit)
03मैमोरी यूनिट (Memory Unit)

कंप्यूटर आर्किटेक्चर कौन है? – इनपुट यूनिट (Input Device) द्वारा हम अपना डेटा (Data) या निर्देश (instruction) अथवा प्रोग्राम (program) कम्प्यूटर में प्रविष्ट (Input) कराते हैं। जो सी. पी. यू. (CPU) के द्वारा ग्रहण किया जाता है और मैमोरी (Memory) में उचित स्थान पर स्टोर कर दिया जाता है।

आवश्यकता पड़ने पर ए. एल. मैमोरी (ALU Memory) से ही डेटा (Data) तथा निर्देश (instruction) ले लेता है, जहाँ कण्ट्रोल यूनिट (Control Unit) के आदेश के अनुसार उन पर विभिन्न क्रियाएँ (Processing) की जाती हैं और परिणाम आउटपुट यूनिट (Output Device) को प्रेषित (Sent) कर दिए जाते हैं। या पुनः मैमोरी में ही रख दिए जाते हैं। अन्य सभी यूनिट्स कण्ट्रोल यूनिट (Units control unit) के नियन्त्रण में कार्य करती है Computer Architecture in Hindi । 

कंप्यूटर आर्किटेक्चर का महत्व क्या है? 

कंप्यूटर आर्किटेक्चर का महत्व कम्प्युटर के सभी हार्डवेयर जैसे की  इनपुट और आउटपुट डिवाइस के साथ – साथ डाटा को ट्रास्न्फ़र करना और प्रोसेसिंग रिज़ल्ट को दिखने के लिए एक अच्छा और फास्ट कनैक्शन प्रदान करना है ।  कंप्यूटर आर्किटेक्चर के विकास से कम्प्युटर की डाटा प्रोसेसिंग मे व्रद्धि हुई है। जिससे समय की बचत हुई और डाटा ज्यादा सटीक हुआ है ।

इनपुट यूनिट (Input Unit)

Input Unit वे Hardware होते हैं जो Data को Computer में भेजते हैं। बिना Input unit के Computer TV की तरह दिखने वाली एक ऐसी Display unit हो जाता है, जिससे उपयोगकर्ता कोई कार्य नहीं कर सकता।

इनपुट यूनिट का कार्य यह है कि हम अपनी भाषा में इसको जो भी डेटा (Data) या आदेश (Instruction) देते हैं। उसे ये बाइनरी कोड ( Binary Code) में बदलकर कम्प्यूटर (अर्थात् सीपीयू) में भेज देते हैं। संक्षेप में,

Input unit द्वारा निम्न कार्य किए जाते हैं :

  1. यह उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए निर्देशों (Instructions ) तथा डेटा (Data) को पढ़ती या स्वीकार करता है।
  2. यह निर्देशों और डेटा को कम्प्यूटर द्वारा स्वीकार किए जाने वाले रूप में बदलती हैं।
  3. यह बदले हुए रूप में इन Instructions और Data को आगे की Processing के लिए Computer को भेज देता है।

आउटपुट यूनिट (Output Unit)

डेटा (Data) तथा निर्देशों ( Instructions) को परिणाम के रूप में प्रदर्शित करने के लिए जिन यूनिट्स (Units) का उपयोग किया जाता है, उन्हें आउटपुट यूनिट (Output units) कहते हैं।

आउटपुट यूनिट (Output units) का कार्य यह है कि वह कम्प्यूटर (Computer) से प्राप्त होने वाले परिणामों को जो बाइनरी कोड (Binary code) में होते हैं। हमारे लिए उचित संकेतों (Symbols) या भाषा (Language) तथा चित्र (Image) में

बदलकर हमें उपलब्ध कराता है। संक्षेप में आउटपुट यूनिट (Output Unit) द्वारा निम्न कार्य किए जाते हैं।

  1. यह Computer  द्वारा दिए गए परिणामों को स्वीकार करता है, जोकि Binary code के रूप में होते हैं और जिन्हें हमारे लिए समझना कठिन होता है।
  2. यह उन कोड के रूप में दिए गए परिणामों को हमारे द्वारा पढ़ने या समझने योग्य रूप में बदल देता है।
  3. यह बदले हुए रूप में परिणामों को हमारे समक्ष प्रस्तुत करता है या छाप देता है।

सेण्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit-CPU)

CPU ही प्रोसेसिंग यूनिट ( Processing unit) और कम्प्यूटर (Computer) का वह भाग होता है, जिसमें अरिथमैटिक और लॉजिकल ऑपरेशन्स (Arithmetic and Logical Operations) निष्पादित होते हैं तथा निर्देश (Instructions ) डिकोड (Decode ) और एक्जिक्यूट (Execute) किए जाते हैं।

CPU कम्प्यूटर के सम्पूर्ण ऑपरेशन्स (Operations) को नियन्त्रित करता है। सीपीयू को कम्प्यूटर का मस्तिष्क कहा जाता है। माइक्रो कम्प्यूटर के सीपीयू को माइक्रोप्रोसेसर भी कहा जाता है। यह कम्प्यूटर Computer के बाहरी व आन्तरिक डिवाइसों (External and Internal Devices ) को कण्ट्रोल करता

सीपीयू (CPU) के प्रमुख कार्य निम्न हैं

  1. यह निर्देशों (Data Instructions) तथा डेटा को मुख्य मैमोरी (Main Memory) से रजिस्टर्स में स्थानान्तरित करता है।
  2. निर्देशों का क्रमिक रूप से क्रियान्वयन (Execution) करता है।
  3. आवश्यकता पड़ने पर यह आउटपुट डेटा (Output Data) को रजिस्टर्स (Registers) से मुख्य मैमोरी में स्थानान्तरित (Transferred) करता है।

सीपीयू (CPU) के प्रमुख तीन अवयव निम्नलिखित हैं।

1. अरिथमैटिक एण्ड लॉजिक यूनिट (Arithmetic and Logical Unit-ALU)

जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट हैं, सीपीयू (CPU) के लिए सभी प्रकार की अंकगणितीय क्रियाएँ (जोड़ना, घटाना, गुणा करना तथा भाग देना) (Add, Subtraction, Multiply and Divide) और तुलनाएँ (दो संख्याओं में यह बताना कि कौन-सी छोटी या बड़ी है अथवा दोनों बराबर हैं),

इसी यूनिट में की जाती हैं। यह यूनिट कई ऐसे इलेक्ट्रॉनिक परिपथों (Circuits) से बनी होती है, जिनमें एक ओर से कोई दो संख्याएँ भेजने पर दूसरी ओर से उनका योग (Sum),अन्तर (Difference) गुणनफल (Product) या भागफल (Quotient) प्राप्त हो जाता हैं।

इसमें सारी क्रियाएँ बाइनरी पद्धति में की जाती हैं। प्राप्त होने वाली संख्याओं तथा क्रियाओं के परिणामों को अस्थाई रूप से स्टोर करने या रखने के लिए इसमें कई विशेष बाइटें होती हैं, जिन्हें रजिस्टर (Resister) कहा जाता है।


रजिस्टर्स (Registers) 

रजिस्टर (Register) एक ऐसा उपकरण या साधन है, जिसमें डेटा स्टोर (Data Store) किया जाता है।। रजिस्टर्स बहुत तेज गति वाली अस्थाई स्टोरेज युक्ति (Temporary Storage Device) हैं।

मैमोरी (Memory) के अनुक्रम (Memory Hierarchy) में रजिस्टरों का स्थान सबसे ऊँचा होता है और ये सीपीयू (CPU) को किसी डेटा का उपयोग करने के लिए सबसे तीव्र मार्ग देते हैं। किसी प्रोग्राम (Program) के क्रियान्वयन को सबसे तीव्र गतिशीलता प्रदान करने के लिए रजिस्टरों (Resister )का व्यापक प्रयोग किया जाता है।

2. कण्ट्रोल यूनिट (Control Unit)

इस भाग का कार्य सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। यह कम्प्यूटर (computer) के सभी भागों के कार्यों पर नज़र रखता है और उनमें परस्पर तालमेल बैठाने के लिए उचित आदेश भेजता है। इसका सबसे प्रमुख और पहला कार्य यह है कि हम जिस प्रोग्राम का पालन कराना चाहते हैं,

यह उसे मैमोरी (Memory) में से क्रमशः पढ़कर उसका विश्लेषण (Analysis) करता है और उसका पालन कराता है। किसी आदेश (Instruction) का पालन सुनिश्चित करने के लिए वह कम्प्यूटर के दूसरे सभी भागों को उचित निर्देश जारी करता है।

उदाहरण के लिए, मैमोरी (Memory) को आदेश दिया जा सकता है कि वह कोई डेटा (Data) किसी स्थान पर स्टोर कर दे या वहाँ से उठाकर (पढ़कर) एएलयू (ALU) में भेज दे। कम्प्यूटर  (computer)  के सभी भागों में तालमेल बनाकर प्रोग्रामों का ठीक-ठाक पालन कराना इसी इकाई का दायित्व है।

इस प्रकार सीपीयू (CPU) की सभी यूनिटों द्वारा आपसी सहयोग से उपयोगकर्ता द्वारा बताए गए कार्य किए जाते हैं। इसके लिए जब भी किसी इनपुट की आवश्यकता होती है। वह किसी इनपुट यूनिट (Input Unit) से ले लिया जाता है और जो परिणाम या सन्देश आते हैं, उन्हें किसी आउटपुट यूनिट को भेज दिया जाता

है।

3 .माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor)

सीपीयू (CPU) किसी कम्प्यूटर का मस्तिष्क (Brain) होता है। इसी के अन्दर सभी प्रकार की गणनाएँ (Calculations ) और प्रोसेसिंग की जाती है, इसको ही प्रोसेसर (Processor) भी कहा जाता है। माइक्रो कम्प्यूटरर्स (Micro Computers ) के लिए जिस प्रोसेसर (Processor) का उपयोग किया जाता है, उसे माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessors) कहा जाता है। इसी के द्वारा सभी कार्य किए जाते हैं। वैसे कभी-कभी जटिल गणनाओं के लिए अलग से मैथ प्रोसेसर (Math Processor) भी लगाया जाता है।

माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor) एक सेमीकण्डक्टर इण्टीग्रेटड सर्किट (Semiconductor Integrated Circuit) पर बनाई गई प्रोग्राम करने योग्य (Programmable) डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक वस्तु हैं। जो किसी सेण्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) के सभी कार्य करती है। यह कम्प्यूटर का दिल व मस्तिष्क होता है। यह केवल मशीनी (Machine) भाषा ही समझती है।

  • इण्टेल 4004 (Intel 4004) पहला ऐसा माइक्रोप्रोसेसर (Micro Processor) था, जिसमें सीपीयू  (CPU) के सभी अवयव एक चिप (Chip) पर लिए गए।
  • कुछ महत्वपूर्ण माइक्रोप्रोसेसरों (Microprocessor)  के नाम हैं। – इण्टेल (Intel) डूऐल कोर (Dual Core) तथा पेण्टियम IV (Pentium IV) आदि ।

कम्प्युटर की विशेषता


मैमोरी यूनिट (Memory Unit)

मैमोरी कम्प्यूटर (Memory Computer) का वह भाग है जो Data तथा Instruction को Store करती है।  कम्प्यूटर की मैमोरी आधुनिक कम्प्यूटरों के मूल कार्यों में से एक अर्थात् सूचना

भण्डारण (Information Retention ) की सुविधा प्रदान करती है। यह कम्प्यूटर के सीपीयू (CPU) का एक भाग होती हैं और उससे मिलकर सम्पूर्ण कम्प्यूटर बनाती है।

मैमोरी यूनिट (Memory Unit) के दो भाग होते हैं।

(1) प्राथमिक मैमोरी (Primary Memory )

(2) सेकेण्डरी मैमोरी (Secondary Memory )

1. प्राथमिक मैमोरी (Primary Memory)

इसे आन्तरिक (Internal) या मुख्य (Main Memory) मैमोरी भी कहा जाता है। यह सीपीयू ( CPU) से सीधे जुड़ी होती है। इसका अर्थ हैं कि सीपीयू CPU) इसमें स्टोर किए गए निर्देशों (Instructions )को लगातार पढ़ता रहता है और उनका पालन करता रहता है। इसके साथ ही कोई डेटा (Data) जिस पर सक्रियता से कार्य किया जा रहा है वह भी इसमें स्टोर किया जाता है।

प्राइमरी मैमोरी (Primary Memory) में किसी समय चल रहें प्रोग्राम / प्रोग्रामों तथा उनके इनपुट डेटा (Input Data) और आउटपुट (Output) का अस्थाई ( Temporary) रूप से कुछ समय के लिए स्टोर (Store) किया जाता है।

जैसे ही उनकी आवश्यकता समाप्त हो जाती है, उन्हें हटाकर दूसरे डेटा (Data) या प्रोग्राम (Program) उस जगह रखे जा सकते हैं। प्राइमरी मैमोरी (Primary Memory) का आकार सीमित होता है परन्तु इनकी गति बहुत तेज होती है।

प्राइमरी स्टोरेज (Primary Memory) यूनिट में निम्न सूचनाएँ रखी जाती हैं।

  • प्रोसेस (Process ) किए जाने वाले समस्त डेटा और उसको प्रोसेस करने के लिए आवश्यक निर्देश जो इनेपुट साधनों से प्राप्त किए गए होते हैं।
  • प्रोसेसिंग के मध्यवर्ती (Intermediate) परिणाम।
  • प्रोसेसिंग के अन्तिम (Final) परिणाम उन्हें आउटपुट साधन को भेजे जाने तक सुरक्षित रखा जाता है। 

प्राइमरी मैमोरी दो प्रकार की होती हैं

(1A) रैण्डम एक्सेस मैमोरी (Random Access Memory )

(2B) रीड ओनली मैमोरी (Read Only Memory)

1A. रैण्डम एक्सेस मैमोरी (Random Access Memory-RAM)

Computer RAM in hindi

इसे संक्षेप में रैम (RAM) कहा जाता है। यह मैमोरी (Memory) एक चिप पर होती है, जो मैटल-ऑक्साइड सेमीकण्डक्टर (Metal oxide semiconductor MOS) से बनी होती है। हम इस मैमोरी (Memory) के किसी भी लोकेशन को चुनकर उसका उपयोग सीधे ही किसी डेटा को स्टोर करने या उसमें से डेटा पढ़ने के लिए कर सकते हैं।

यह मैमोरी ऐसे रजिस्टरों (Registers ) और उनसे जुड़े हुए परिपथों (Circuits) से बनी होती हैं, जिनसे डेटा को वहाँ तक और वहाँ से स्थानान्तरित करना सम्भव हो। ऐसे

प्रत्येक लोकेशन का एक निश्चत पता (Address) होता है। जिसकी सहायता से हम उस लोकेशन तक पहुँच सकते हैं। इस मैमोरी के रजिस्टरों या लोकेशनों को हम आवश्यकता होने पर कभी भी उपयोग में ला सकते हैं। इसलिए इसका नाम रैंण्डम एक्सेस मैमोरी (Random Access Memory) रखा गया है। रैम (RAM) मे भरी जाने वाली सूचनाएँ अस्थाई होती हैं और

जैसे ही कम्प्यूटर की बिजली बन्द कर दी जाती हैं वैसे ही वे समस्त सूचनाएँ (Information) नष्ट हो जाती हैं। रैम (RAM) में वे प्रोग्राम (Program) और डेटा रखे जाते हैं, जिनको सीपीयू (CPU) खोज सके और वहाँ से प्राप्त कर सकें। इस मैमोरी को भी कई सेक्शनों में बाँटा जाता है,

ताकि उसमें रखी गई सूचनाओं को व्यवस्थित किया जा सके और उन्हें पाया जा सके। ऐसे प्रत्येक सेक्शन का एक निश्चित पता होता हैं किसी डेटा बस की सहायता से हम रैम से किसी सूचना को निकाल सकते हैं या उसमें कों सूचना स्टोर कर सकते हैं।

इन्स्ट्रक्शन फॉर्मेट (Instruction Format)

कम्प्यूटर (Computer ) द्वारा निर्देशों (Computer) को केवल 0 व 1 के रूपों में समझा जाता है जिसे मशीनी भाषा (Machine Language ) कहते हैं। एक कम्प्यूटर प्रोग्राम निर्देशों (Computer Program Instruction)  का एक समूह है, जोकि किसी टास्क ( कार्य ) को पूरा करने के लिए आवश्यक स्टेप्स (Steps) को विस्तारपूर्वक करता है।

किसी भी प्रोसेसर (Processor) को कार्य करने के लिए दो प्रकार के इनपुट की आवश्यकता होती है।

डेटा (Data) तथा निर्देश (Instruction)

निर्देश कम्प्यूटर को बताते हैं कि किसी विशेष कार्य को करने के लिए कौन-सी क्रिया की जानी चाहिए। किसी भी निर्देश को दो भागों में बाँटा जा सकता है

ऑपरेशन (Operation or Op-code) तथा ऑपरेण्ड (Operand) -ऑपरेशन वे क्रिया होती हैं, जिन्हें परफॉर्म किया जाता है तथा ऑपरेण्ड वे होते है जिन पर ऑपरेशन किया जाता है। उदाहरण के लिए +, यहाँ A तथा B ऑपरेण्ड हैं तथा ‘+’ ऑपरेशन हैं।

इन्स्ट्रक्शन साइकिल (Instruction of Cycle)

कण्ट्रोल यूनिट (Control Unit)  को कम्प्यूटर (computer) का नाड़ी तन्त्र (Vascular system) भी कहते हैं। सारे आदेश कण्ट्रोल यूनिट (Control unit ) से गुजरते हैं। यहाँ पर जो निष्पादन प्रोसेसिंग (Processing ) होती हैं, उसे इन्स्ट्रक्शन साइकिल (Instruction Cycle ) कहते हैं।

Generation Of Computer In Hindi

Computer Architecture in hind

पूरी इन्स्ट्रक्शन साइकिल (Instruction Cycle) में निम्न चार चरण होते हैं।

फैचिंग (Fetching)

इस चरण में मैमोरी से निर्देश को फँच (Fetch)करके निर्देश रजिस्टर ( Introduction Register) ( एक परिपथ जो एकनिर्देश को रखने में सक्षम होता है) में लाता है, ताकि वह निर्देश डीकोड तथा क्रियान्वित किया जा सके।

डीकोडिंग (Decoding)

दिए गए निर्देश को डिकोड करना अर्थात् दिए गए निर्देश की व्याख्या करना ।

प्रभावी पते को पढ़ना (Read the Effective Address)

यदि निर्देश के पास अप्रत्यक्ष पता (Indirect Address) है तो उस पते को मैमोरी से पढ़ना ।

निष्पादन (Execution)

निर्देश (Instruction )का निष्पादन करना । दिए गए चरणों में से, चरण 1 और 2 सभी निर्देशों के लिए एक समान होते हैं तथा फँच चक्र कहलाते हैं और चरण 3 व 4 सभी निर्देशों के लिए अलग-अलग होते हैं तथा निष्पादन चक्र (Execute Cycle) कहलाते हैं। रीड ओनली मैमोरी ( Read Only Memory – ROM)

2B. रोम Read Only Memory (ROM)

Computer Rom in hindi

इसे संक्षेप में रोम (ROM) कहा जाता है। यह वह मैमोरी (Memory) है जिसमें डेटा (Data) पहले से भरा जा चुका होता है और जिसे हम केवल पढ़ सकते हैं। हम उसे हटा या बदल नहीं सकते। वास्तव में रोम चिप (Rom Chip) बनाते समय ही उसमें कुछ आवश्यक प्रोग्राम (Program) और डेटा (Data) लिख दिए जाते हैं। जो स्थाई होते हैं।

जब कम्प्यूटर की बिजली बन्द कर दी जाती है, तब भी रोम चिप में भरी हुई सूचनाएं सुरक्षित बनी रहती हैं। रोम चिपों (ROM Chip) का उपयोग सभी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, जैसे- कैलकुलेटर (Calculator), वीडियो गेम (Video game) , डिजिटल कैमरा (Video game) आदि में किया जाता है।

अधिकांश पर्सनल कम्प्यूटरों (Personal Computers)  में रोम मैमोरी( ROM Memory) के बहुत उपयोग होते हैं। इनमें प्रायः ऐसी सूचनाएँ स्टोर की जाती हैं जो स्थाई और महत्वपूर्ण होती हैं या चे प्रोग्राम स्टोर किए जाते हैं। जिनको बदलने की आवश्यकता नहीं होती; जैसे- कम्प्यूटर को बूट करने वाला प्रोग्राम |

पुराने पर्सनल कम्यूटरों (Personal Computers) में रोम मैमोरी में बेसिक इनपुट-आउटपुट सिस्टम (BIOS) भी स्टोर किए जाते थे। जो पीसी के हार्डवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम  (Operating System) के बीच अनुवादक (Translator) का कार्य करते थे।

2. सेकेण्डरी मैमोरी (Secondary Memory)  

 इस प्रकार की मैमोरी सीपीयू (Memory CPU) से बाहर होती है, इसलिए इसे बाह्य (External) या द्वितीयक मैमोरी (Secondary Memory) भी कहा जाता है। कम्प्यूटर की मुख्य मैमोरी ( Computer memory) बहुत महंगी |

होने तथा बिजली बन्द कर देने पर उसमें रखी अधिकतर सूचनाएँ नष्ट हो जाने | के कारण न तो हम उसे इच्छानुसार बढ़ा सकते हैं और न हम उसमें कोई सूचना स्थाई रूप से स्टोर कर सकते हैं। इसलिए हमें सहायक मैमोरी  (Auxiliary memory) का उपयोग करना पड़ता है।

इसकी कीमत तुलनात्मक दृष्टि से बहुत कम और डेटा स्टोर करने की क्षमता (Capacity) बहुत अधिक होती है। इसमें एक ही कमी है कि इन माध्यमों में डेटा को लिखने (अर्थात स्टोर करने) तथा पढ़ने (अर्थात् प्राप्त करने) में समय् | बहुत लगता है। इसलिए हम इसमें ऐसी सूचनाएँ भण्डारित करते हैं, जिन्हें लम्बे समय तक सुरक्षित रखना हो तथा जिनकी आवश्यकता लगातार नहीं पड़ती हो । 

सहायक मैमोरी (Auxiliary memory) का उपयोग बैकअप (Backup ) के लिए किया जाता है। जब हमें किसी डेटा की तत्काल आवश्यकता नहीं रहती तो उसे किसी चुम्बकीय | माध्यम; जैसे फ्लापी डिस्क या चुम्बकीय टेप पर नकल करके अलग सुरक्षित कर लिया जाता है। ऐसा प्रायः हार्डडिस्क को खाली करने के लिए किया जाता है.

ताकि उस पर ऐसा डेटा भरा जा सके, जिसकी आवश्यकता पड़ रही हो और डिस्क पर जगह न हो। बैकअप साधन में भण्डारित किए गए डेटा को आगे कभी आवश्यकता पड़ने पर हार्डडिस्क (Hard Disc) पर उतारा या नकल किया जा सकता है।

प्रारम्भिक कम्प्यूटरों में छिद्रित कार्ड, पेपर टेप (Punched card, Paper tape) तथा चुम्बकीय टेपों (Magnetic Tapes )का प्रयोग सहायक भण्डारण के लिए किया जाता था। लेकिन आजकल मुख्य रूप से चुम्बकीय डिस्कों का प्रयोग इस कार्य हेतु किया जाता है जो कई प्रकार से सुविधाजनक हैं।


मदरबोर्ड (Motherboard)

एक कम्प्यूटर सिस्टम (Computer System) के विभिन्न बोडों (Boards ) में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण मदरबोर्ड या मेन बोर्ड होता है। वर्ष 1974 में, माइक्रो कम्प्यूटरों (Micro Computers) के निर्माण के प्रारम्भ से ही उनके सभी अनिवार्य इलेक्ट्रॉनिक अवयवों को एक ही छपे हुए सर्किट बोर्ड पर लगाया जाता है जिसे मदरबोर्ड (Motherboard )कहा जाता है।

मदरबोर्ड किसी जटिल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, जैसे- आधुनिक कम्प्यूटर का केन्द्रिय या मुख्य सर्किट बोर्ड होता है। इसे मुख्यबोर्ड (Mainboard), बेसबोर्ड (Baseboard), सिस्टम बोर्ड ( System Board) या लॉजिक बोर्ड (Logic Board) भी कहा जाता है।

किसी मदरबोर्ड का मुख्य उद्देश्य सिस्टम के विभिन्न अवयवों (Components) को आपस में जोड़ने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक और लॉजिकल कनेक्शन उपलब्ध कराना होता है। एक सामान्य डेस्कटॉप कम्प्यूटर उसके मदरबोर्ड में माइक्रोप्रोसेसर, मुख्य मैमोरी और अन्य अनिवार्य अवयव लगाकर बनाया जाता है।

इनके अलावा अन्य बहुत से अवयव, जैसे- बाह्य भण्डारण (External Storage) उपकरण, वीडियो कण्ट्रोलर (Video Controller), साउण्ड कण्ट्रोलर (Sound Controller), बाहरी इनपुट / आउटपुट उपकरण आदि मदरबोर्ड के साथ किसी कनेक्टर या केबिल के माध्यम से जोड़े जाते हैं, हालाँकि कम्प्यूटरों में इनमें से अधिकांश अवयव मदरबोर्ड में पहले से भी जुड़े हुए मिलते हैं ।


 बस (BUS)

सीपीयू (CPU) डेटा, निर्देश तथा सूचना (Data, Instruction and Information) को कम्प्यूटर के विभिन्न अवयवों तथा पैरीफैरल डिवाइसेज़ (Peripheral Devices) को भेजता है। इस आवागमन के लिए विभिन्न बसें प्रयोग की जाती है। कम्प्यूटर में अनेक बसें होती हैं जो विभिन्न कार्यों के लिए प्रयुक्त होती है।

दूसरे शब्दों में एक बस कुछ ऐसे तारों या कनेक्शनों (Connections) का संग्रह होती है, जिनसे होकर सिग्नल एक उपकरण से दूसरे उपकरण एक भेजे जाते हैं। वास्तव में, बस एक संप्रेषण माध्यम (Transmission Medium) है।

बस के प्रकार (Types of BUS)

किसी कम्प्यूटर में अनेक बसें होती हैं, जिन्हें दो भागों में बाँटा जा सकता है

  1. आन्तरिक बस
  2. बाह्य बस

1. आन्तरिक बस (Internal Bus )

मदरबोर्ड के आन्तरिक अवयवों को जोड़ती है; जैसे- सीपीयू एवं सिस्टम मैमोरी। इसे सिस्टम बस भी कहते हैं, जैसे कण्ट्रोल बस, एड्रेस बस आदि ।

मैमोरी तथा इनपुट / आउटपुट डिवाइसेज़ को दिए जाने वाले विभिन्न निर्देश कण्ट्रोल बस द्वारा ले जाए जाते हैं।

इनपुट / आउटपुट डिवाइसेस या मैमोरी के एड्रेस बस द्वारा ले जाए जाते हैं। डेटा को स्थानान्तरित करने वाली बस को डेटा बस (Data Bus ) कहते हैं।

  1. बाह्य बस (External Bus)

विभिन्न बाहरी अवयवों को जोड़ती है; जैसे- पेरीफेरल्स, पोर्ट्स एक्सपेन्शन स्लाट्स आदि ।


इन्हें भी जानें

  • मशीन साइकिल (Machine Cycle) ये वह समय है जो दो ऑपरेण्ड को रजिस्टर्स से लाकर उन पर एएलयू ऑपरेशन (ALU Operation) करके प्राप्त परिणाम को वापस रजिस्टर में स्टोर करने में प्रयोग होता है। 
  • बफर (Buffer) यह एक अस्थाई स्टोरेज क्षेत्र है, जोकि रैम (RAM) में होता है। इसमें डेटा को एक जगह से दूसरी जगह स्थानान्तरित करने के लिए रखा जाता है। कम्प्यूटर में जब डेटा डालते हैं तो वह सबसे पहले बफर में ही स्टोर होता है।
  • किसी कम्प्यूटर के कार्य निष्पादन करने की क्षमता (Performance )उसके रजिस्टर्स, रैम तथा कैश मैमोरी (Registers, RAM and Cache (Memory) के आकार तथा सिस्टम क्लॉक की गति पर निर्भर करती हैं। 
  • मदरबोर्ड पर चिप (Chip) के कनेक्टिंग पोइण्ट्स को सॉकेट्स (Sockets) कहते हैं।
  • किसी डिजिटल कम्प्यूटर की कण्ट्रोल यूनिट को क्लॉक कहते हैं।
  •  इन्स्ट्रक्शन कोड बिट्स का एक ऐसा समूह होता है जो कम्प्यूटर को
  • किसी विशेष कार्य को करने को कहता है।
  • एक युक्ति द्वारा डेटा एवं निर्देशों को लोकेट करने तथा, उसे CPU तक पहँचाने में लिए गए समय को एक प्रोसेसिंग चक्र कहते हैं।

कम्प्युटर


Other 


निष्कर्ष

Computer Architecture in Hindi – हमे उम्मीद है की आपको हमारी ये पोस्ट जरूर पसंद आई होगी अगर हमारी इस पोस्ट मे किसी प्रकार की कोई कमी हो तो आप हमे कमेंट करके बता सकते हो । पहला कंप्यूटर आर्किटेक्चर कौन था?

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